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संघर्ष से राष्ट्रपति भवन तक… रामनाथ कोविंद की आत्मकथा लॉन्च, PM मोदी ने बताया नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक' का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक लोकतंत्र की धरोहर बनेगी और युवाओं को प्रेरित करेगी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

PM Narendra Modi Releases Book: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा अब एक किताब के रूप में देश के सामने है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ का औपचारिक विमोचन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक केवल किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, संघर्ष, सामाजिक बदलाव और सेवा की भावना का ऐसा दस्तावेज है, जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेंगी।

लोकतंत्र की अमूल्य धरोहर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें वर्षों से रामनाथ कोविंद को करीब से जानने और उनके साथ काम करने का अवसर मिला है। राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन, सादगी और राष्ट्र के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणादायक रहा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आत्मकथा भारतीय समाज और लोकतंत्र के लिए लंबे समय तक एक महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगी।

युवाओं के लिए प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि उन्हें इस पुस्तक को जरूर पढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, कोविंद की जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां भी किसी व्यक्ति के सपनों को रोक नहीं सकतीं। मेहनत, धैर्य और संकल्प के बल पर कोई भी व्यक्ति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है।

महापुरुषों का सपना

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत के महान समाज सुधारकों और राष्ट्रनिर्माताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसी विभूतियों ने ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां हर वर्ग और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। रामनाथ कोविंद का जीवन उसी सपने को साकार करने वाली प्रेरक मिसाल है।

कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को भविष्य में कोविंद जैसे और युवाओं की जरूरत है, जो चुनौतियों के सामने हार न मानें, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से नई राह बनाएं। उनका मानना है कि ऐसे ही लोगों के प्रयासों से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति की कार्यनिष्ठा की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति पद से कार्यकाल पूरा होने के बाद भी रामनाथ कोविंद सार्वजनिक जीवन से दूर नहीं हुए। वे आज भी ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, यदि इस दिशा में व्यापक सहमति बनती है तो यह भारतीय लोकतंत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

संघर्षों की दर्दनाक कहानी

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कोविंद के बचपन से जुड़ी एक बेहद भावुक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोविंद ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि बचपन में उनके घर में भीषण आग लग गई थी। उस समय उनकी मां घर का सामान बचाने की कोशिश करते हुए आग की चपेट में आ गईं और उनकी मृत्यु हो गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में मां को खो देना किसी भी बच्चे के लिए बेहद दर्दनाक होता है, लेकिन इस त्रासदी ने कोविंद को कमजोर करने के बजाय और मजबूत बनाया।

प्रेरणा की विरासत

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह आत्मकथा पूर्व राष्ट्रपति के बचपन, शिक्षा, संघर्ष, सार्वजनिक जीवन, संवैधानिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रपति पद तक के पूरे सफर का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। पुस्तक में उन अनुभवों और मूल्यों का भी उल्लेख है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और लोकसेवा की भावना को आकार दिया। प्रधानमंत्री ने अंत में रामनाथ कोविंद को इस आत्मकथा के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह किताब आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की अमूल्य विरासत बनेगी।

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